मैं सोया था गहरी नींद जगाकर चली गई,
मैने पूंछा चांद निकलता है किस तरह,
तो चेहरे से अपने जुल्फ हटाकर चली गई।
2. जब मौसम बदले हर बार तो आंधी नहीं आया करती,
हर किसी के प्यार की काली यूँ नहीं मुरझाया करती,
यह दिल तोड़ने वाली इतना तो जानती होगी,
की दिल टूटने की कभी आवाज़ नहीं आया करती।
3. कलम उठाई है, लफ्ज नही मिलता,
जिसे ढूँढ रहा हूँ वो शक्स नही मिलता,
फिरते हो तुम जमाने की तलाश में,
बस हमारे लिए तुम्हें वक्त नही मिलता।
4. बेताब तमन्नाओ की कसक रहने दो,
मंजिल को पाने की कसक रहने दो,
आप चाहे रहो नज़रों से दूर,
पर मेरी आँखों में अपनी एक झलक रहने दो।
5. मिली जो मंजिल तो कारवां भी बड़ा लग रहा था,
वरना सफ़र में हर शख्स मुझे ठग रहा था,
यूँ ही नहीं पहुंचा हूँ आज मैं इस मुकाम पर,
जब सो रहा था ये ‘जग’ तब मैं ‘जग’ रहा था।






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