मैं अबरार खान आपका स्वागत करता हूं अपने इस ब्लॉग पर, आपको यहां बहुत ही खूबसूरत शायरियों का कलेक्शन मिलेगा। मैं आशा करता हूं आपको ये शायरियां पसंद आयेगी। अगर आपको मेरी शायरियां अच्छी लगती है तो कमेन्ट करके जरूर बताए धन्यवाद
1. क्या करूँगा उसका इंतज़ार कर के,
जब चली गई वो मुझे बर्बाद कर के,
सोचा था अपना भी एक जहाँ होगा,
मगर मिली सिर्फ तन्हाई उनसे प्यार कर के।
2. शिक़वा वो भी करते हैं शिकायत हम भी करते हैं,
मोहब्बत वो भी करते हैं मोहब्बत हम भी करते हैं।
3. तू तो नफ़रत भी न कर पायेगा इस शिद्दत के साथ,
जिस तरह का प्यार बेखबर तुझसे मैंने किया।
4. हँसते हुए ज़ख्मों को भुलाने लगे हैं हम,
हर दर्द के निशान मिटाने लगे हैं हम,
अब और कोई ज़ुल्म सताएगा क्या भला,
ज़ुल्मों सितम को अब तो सताने लगे हैं हम।
5. हर सितम सह कर कितने गम छिपाए हमने,
तेरी ख़ातिर हर दिन आँसू बहाए हमने,
तू छोड़ गया जहाँ हमें राहों में अकेला,
बस तेरे दिए ज़ख्म हर एक से छिपाए हमने।
6. आप आँखों से दूर दिल के करीब थे,
हम आपके और आप हमारे नसीब थे,
न हम मिल सके, न जुदा हुए,
रिश्ते हम दोनों के कितने अजीब थे।
1. क्या करूँगा उसका इंतज़ार कर के,
जब चली गई वो मुझे बर्बाद कर के,
सोचा था अपना भी एक जहाँ होगा,
मगर मिली सिर्फ तन्हाई उनसे प्यार कर के।
2. शिक़वा वो भी करते हैं शिकायत हम भी करते हैं,
मोहब्बत वो भी करते हैं मोहब्बत हम भी करते हैं।
3. तू तो नफ़रत भी न कर पायेगा इस शिद्दत के साथ,
जिस तरह का प्यार बेखबर तुझसे मैंने किया।
4. हँसते हुए ज़ख्मों को भुलाने लगे हैं हम,
हर दर्द के निशान मिटाने लगे हैं हम,
अब और कोई ज़ुल्म सताएगा क्या भला,
ज़ुल्मों सितम को अब तो सताने लगे हैं हम।
5. हर सितम सह कर कितने गम छिपाए हमने,
तेरी ख़ातिर हर दिन आँसू बहाए हमने,
तू छोड़ गया जहाँ हमें राहों में अकेला,
बस तेरे दिए ज़ख्म हर एक से छिपाए हमने।
6. आप आँखों से दूर दिल के करीब थे,
हम आपके और आप हमारे नसीब थे,
न हम मिल सके, न जुदा हुए,
रिश्ते हम दोनों के कितने अजीब थे।






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