कर्म की साख़ को हिलाना होगा,
कुछ नही होगा कोसने से किस्मत को,
अपने हिस्से का दीया ख़ुद ही जलाना होगा।
2. तुम खास नहीं हो ,मगर हर सांस में हो,
रू-ब-रू नहीं हो मगर ,हर एहसास में हो,
मिलोगे या नहीं मगर ,मेरी हर तलाश में हो,
चाहे पूरी हो या ना हो ,मगर हर आस में हो,
दूर ही सही तुम ,मगर फिर भी पास ही हो।
3. मिटा दे अपनी हस्ती को अगर कुछ मर्तबा चाहे,
के दाना ख़ाक में मिलकर गुलो गुलज़ार बनता है।
जरा दरिया की तह तक तू पहुँचने की हिम्मत कर,
तोह फिर ऐ डूबने वाले किनारा ही किनारा है।
4. हर ज़ुबा पे एक दिन तेरा ही नाम होगा,
हर कदम पे तेरे दुनिया का सलाम होगा,
हर मुसीबत का सामना करना तू डट कर,
तू देखना समय तेरा भी गुलाम होगा।
5. वक्त की एक आदत बहुत अच्छी है,
जैसा भी हो गुजर जाता है,
और जीवन मे कितने भी कड़े इम्तेहान हो,
वो यादे बनके सीने में उतर जाता है।






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